आत्मज्ञान कैसे होता है ?
आत्मज्ञान – महापुरुषों के वचन हैं कि निद्रा भोजन भोग भय, ये पशु पुरुष समान । नरन ज्ञान निज अधिकता, ज्ञान बिना पशु जान ॥ अर्थात् नींद करना, भोजन खाना, परिवार की वृद्धि करना, शत्रु के भय से स्वयं को बचाना-ये सब समझ तो पशु और पुरुष में समान है। इन्सान की बढ़ाई यह है … Read more