श्री परमहंस दयाल जी का गृहत्याग
श्री परमहंस जी का गृहत्याग पिता और धर्मपिता दोनों के सम्बन्धी आपको दोनों परिवारों की सम्पत्तियों का उत्तराधिकारी बनाने के लिए। पगड़ी आदि लेकर पीछे पड़े परन्तु आपने सबसे पल्ला छुड़ा लिया। अब आप पूर्ण स्वतन्त्र थे। बोले, ‘कुदरत को यह बात मन्जूर नहीं। उसने हमको किसी विशेष काम के लिए पैदा किया है, इसलिए … Read more