
राम तजूँ पै गुरु न बिसारूँ ।
गुरु के सम हरि को न निहारूँ
हरि ने जन्म दियो जग माहीं
गुरु ने आवागमन छुटाहीं
राम तजूँ पै गुरु न बिसारूँ ।
गुरु के सम हरि को न निहारूँ….
हरि ने पांच चोर दिये साथा
गुरु ने लइ लुटाय अनाथा
राम तजूँ पै गुरु न बिसारूँ ।
गुरु के सम हरि को न निहारूँ….
हरि ने कुटुंब जाल में गेरी
गुरु ने काटी ममता मेरी