नाम जप का प्रभाव श्रीदुर्लभदास बाबाजी (गोविन्दकुण्ड)

श्रीगोविन्दकुण्ड में जब श्रीमनोहरदास बाबाजी ने रहना प्रारम्भ किया, उस समय कुण्ड के उत्तरी तट पर श्रीदुर्लभदास बाबाजी भजन करते थे। वृन्दावन में प्लेग का प्रकोप हुआ। दुर्लभदास एक दिन दोपहर की कड़ी धूप में एक नीम के वृक्ष के नीचे बैठे थे। हाथ में माला थी, नाम जप कर रहे थे। सहसा उनके सामने धूम्रवर्ण की एक प्रकाण्ड भीषण मूर्ति उपस्थित हुई। वह उनके चारों ओर घूमने लगी। उन्होंने विस्मय भरे स्वर में पूछा- ‘आप कौन हैं? यहाँ किसलिए आये हैं?’
‘मैं कालदूत हूँ। आपको लेने आया हूँ’ उस छाया-मूर्ति ने उत्तर दिया। ‘तो ठीक है। ले चलिये, मैं तैयार हूँ’ बाबा ने प्रशान्त भाव से उससे कहा। ‘आप नाम-जप छोड़ दें। जब तक नाम जप नहीं छोड़ेंगे, मैं आपको नहीं ले जा सकूँगा’ कहकर उसने अपनी लाचारी प्रकट की।
‘मैं नाम-जप नहीं छोडूंगा। आप मुझे ऐसे ही ले चलें’ दुर्लभदास ने दृढ़तापूर्वक कहा।
छायामूर्ति अन्तर्धान हो गयी। मनोहरदास बाबा जब गुफा से बाहर निकले, दुर्लभदास ने उन्हें सारा वृतान्त कह सुनाया। वे बोले- ‘तुम्हारा इस समय मृत्युयोग था। भजन के प्रभाव से टल गया और आयु में वृद्धि हो गयी।’
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