कर्म सिद्धांत की व्याख्या – प्रश्नावली

कर्म सिद्धांत की व्याख्या प्रश्न 1 . भगवान् के अवतार प्रभु श्रीराम, ईसा मसीह और बुद्ध जैसे महापुरुषों को दुःख क्यों उठाने पड़े? क्या उनके कोई अशुभ कर्म थे? यदि सन्त महापुरुष सब गुणों से ऊपर होते हैं, तो वे शारीरिक दुःख-कष्टों से पीड़ित क्यों दिखाई देते हैं? उत्तर– जब सन्त इस संसार में आते … Read more

वाणी की मधुरता

वाणी की मधुरता हमें अपनी वाणी पर पूर्ण नियन्त्रण रखना चाहिए। बिना सोचे विचारे कोई भी शब्द अपनी जिवा पर नहीं लाना चाहिए। शस्त्र द्वारा किया गया घाव तो समय पाकर भर जाता है लेकिन अनुचित शब्द बोलकर किया गया घाव जीव को मरते दम तक दुःख देता रहता है। इसलिए पहले तोलो फिर बोलो। … Read more

नकारात्मक विचारों से कैसे बचें

विचारों से कैसे बचें सुखमनी साहिब में वर्णन आया है साथि न चालै बिनु भजन बिखिआ सगली छारु ॥ हरि हरि नामु कमावना नानक इहु धनु सारु ॥ फ़रमाते हैं कि केवल नाम का धन ही है जो आत्मा के साथ जाता है। बाकी जगत का सारा पसारा मिथ्या व नश्वर है। सब यहीं का … Read more

सत्य और असत्य क्या है ?

सत्य और असत्य की परख गुरुमुखो! शास्त्रों में लिखा है ‘सत्यमेव जयते’। सत्य की सदैव विजय होती है और यह सत्य वस्तु क्या है ? यह सत्य वस्तु है मालिक का नाम। जिसके हृदय में नाम का वास होता है, वही सच्चा पुरुष है और उसकी वाणी भी सत् होती है। आसा दी वार में … Read more

श्री परमहंस दयाल जी का गृहत्याग

श्री परमहंस जी का गृहत्याग पिता और धर्मपिता दोनों के सम्बन्धी आपको दोनों परिवारों की सम्पत्तियों का उत्तराधिकारी बनाने के लिए। पगड़ी आदि लेकर पीछे पड़े परन्तु आपने सबसे पल्ला छुड़ा लिया। अब आप पूर्ण स्वतन्त्र थे। बोले, ‘कुदरत को यह बात मन्जूर नहीं। उसने हमको किसी विशेष काम के लिए पैदा किया है, इसलिए … Read more

गोस्वामी तुलसीदास जी का जीवन परिचय

गोस्वामी तुलसीदास जी की संक्षिप्त जीवनी तुलसीदास जी का जन्म प्रयागके पास चित्रकूट जिलेमें राजापुर नामक एक ग्राम है, वहाँ आत्माराम दूबे नामके एक प्रतिष्ठित सरयूपारीण ब्राह्मण रहते थे। उनकी धर्मपत्नीका नाम हुलसी था। संवत् १५५४ की श्रावण शुक्ला सप्तमीके दिन अभुक्त मूल नक्षत्र में इन्हीं भाग्यवान् दम्पतिके यहाँ बारह महीनेतक गर्भमें रहनेके पश्चात् गोस्वामी … Read more

अविवेक से बचो

अविवेक से बचो एक कथा है— एक बार एक आदमी अपने कंधे पर एक मेमने को उठाकर ले जा रहा था। उसी रास्ते पर तीन ठग भी जा रहे थे। उन ठगों की दृष्टि जैसे ही उस मेमने पर पड़ी, उन्होंने मेमने को उस आदमी से ठगने की योजना बनाई। तीनों ने मिलकर परामर्श किया … Read more

भेड़चाल

भेड़चाल एक दृष्टांत – शिव मंदिर के समीप एक कुम्हार का घर था। जब शाम के समय शिव मंदिर में आरती होती, कुदरती उसी समय ही उसका गधा रेंगना आरम्भ कर देता। कुम्हार ने अपने मन के ख्यालों से ही माना कि यह भी अपनी भाषा में आरती ही गा रहा है इसलिए यह पिछले … Read more

प्रश्न उत्तर

प्रश्न उत्तर कौन सा मार्ग सुगम है? भक्ति मार्ग बहुत सुगम है। इसमें कोई कठिनाई नहीं। जिस दिन से आरम्भ करो उसी दिन से यह सुखदायी है, दुःख का लेशमात्र भी नहीं। विरह में भी अजीब आनन्द है जिसको विरही ही जानते हैं। इसमें न कोई विशेष साधन है और न कोई खास सामग्री। ऐसा … Read more

सतगुरु शब्द उलंधि कर

सतगुरु शब्द उलंधि कर  कितने ही किस्म व संस्कारों के लोग सतगुरु शब्द उलंधि कर- सद्गुरु के दरबार में कितने ही किस्म व संस्कारों के लोग आते हैं। जिनके संस्कार ऊँचे होते हैं वे हुकम के पाबन्द रहकर सद्गुरु की कृपादृष्टि प्राप्त कर लेते हैं। परन्तु कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो हुकम की … Read more

भक्त जोगासिंह

भक्त जोगासिंह  यह किस जोगा है? एक दृष्टांत है- भक्त जोगासिंह जब छोटा था तो अपने पिता जी के साथ दशम पादशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के दर्शन हेतु जाया करता था। एक दिन गुरु साहिब जी द्वारा नाम पूछे जाने पर उसके पिता जी ने बताया कि इसका नाम जोगा है। गुरु साहिब … Read more

सत्मार्ग

सत्मार्ग जौहरी के संग में इन्सान को जैसे हीरे को परखने मिलती है, वैसे ही संत सद्गुरु के संग में जीव की “सूझबूझ की अंदर की आँख खुलती है और सच झूठ को परखने की विवेक शक्ति मिलती है। जिनकी आँख खुल जाती है, वे स्वयं को सच पर कुर्बान कर देते हैं, लेकिन सच … Read more