
मेरे मुर्शिद पिया ये तेरा मैय-कदा
जो खुला तो खुला का खुला रह गया
भीड़ बढ़ती गई लोग पीते गए
और सागर भरा का भरा रह गया
लज़्ज़ते इश्क़ मुर्शिद न कुछ पूछिए -२
आ गया इश्क़ में बंदगी का मज़ा -२
इनकी चौखट में है वो कशिश वा खुदा -2
सर झुका तो झुका का झुका रह गया -2
वो सरे अंजुमन (महफ़िल) आ चुके है मगर -२
कब वो आये किसी को नहीं है खबर -२
आँख भी न उठी दीद भी हो गया -२
रूपे पर्दा पड़ा का पड़ा रह गया -२
मेरे मुर्शिद पिया, ये तेरा मैय-कदा
जो खुला तो खुला का खुला रह गया
भीड़ बढ़ती गई लोग पीते गए
और सागर भरा का भरा रह गया
इनकी चौखट के जितने परस्तार (चाहने वाले) थे -२
सब ही मानो ज़र के तलबग़ार थे -२
इनकी दौलत कोई लेने वाला था -२
देने वाला खड़ा का खड़ा रह गया -२
मेरे मुर्शिद पिया, ये तेरा मैय-कदा
जो खुला तो खुला का खुला रह गया
भीड़ बढ़ती गई लोग पीते गए
और सागर भरा का भरा रह गया
ज़िन्दगी की क़शिश रोकती रह गई
जशन इ हैरत बस देखती रह गई
एक दीवाना दुनिया से मुँह मोड़ कर
इनके दर पे पड़ा का पड़ा रह गया
मेरे मुर्शिद पिया, ये तेरा मैय-कदा
भीड़ बढ़ती गई लोग पीते गए
और सागर भरा का भरा रह गया
लज़्ज़ते इश्क़ मुर्शिद न कुछ पूछिए -२
आ गया इश्क़ में बंदगी का मज़ा -२
इनकी चौखट में है वो कशिश वा खुदा -2
सर झुका तो झुका का झुका रह गया -2
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