
तुझको पाया है ज़माने से किनारा करके
तुम बदल देते हो किस्मत को इशारा करके
छान कर ख़ाक ज़माने की यहीं सोचा है
उम्र काटू तेरे टुकड़ो पे गुजारा करके ..
बे सहारो को दिया तुमने सहारा रहबर
हम गुनाहो पे करम करदो ख़ुदारा करके
तेरे दरबार से उठ करके कहाँ जायेंगे
हम लगाएंगे तेरे नाम का जयकारा दर पे
न तो दौलत की तमन्ना न मुझे शौहरत की
कुछ भी दे दे तेरी चौखट का उतारा करके
क्यू किसी गैर के दर पे मै झुकाऊ सर को
जब सुकून मिल ही गया तुम्हारे दर पे
तुमको पाया है ज़माने से किनारा करके
तुम बदल देते हो किस्मत को इशारा करके