तेरा शुकराना – मेरे उठने से मेरे सोने तक के लिए तेरा शुकराना

मेरे उठने से मेरे सोने तक के लिए तेरा शुकराना मेरे उठने से मेरे सोने तक के लिए तेरा शुकराना…मेरी हर सांस में तेरे नाम के लिए तेरा शुकराना… मेरे हर गुनाह की माफी के लिए तेरा शुकराना…मुझे अपने नाम जाप देने के लिए तेरा शुकराना…मुझ गिरते को हर बार संभालने के लिए तेरा शुकराना… … Read more

पावन करता है रूह को सत्पुरुषों का सत्संग

कविता- पावन करता है रूह को पावन करता है रूह को सत्पुरुषों का सत्संग। बना ले इसको अपने जीवन का ज़रूरी अंग । कर दर्पण साफ मन का चढ़ा के प्रेम का । सतगुरु से सीख ले जीवन को जीने का ढंग । 2. इक पल साधु के संग से पूर्ण हुए सब काज पाप … Read more

सिर तो देना ही पड़ेगा

सिर तो देना ही पड़ेगा – कविता 1. सिर तो देना ही पड़ेगा काल को या दयाल को । प्रेम में जा समावें सौंपें जो आपा किरपाल को । मन मंदिर में बिठा लेते वे सच्ची सरकार को।अमर पद को पा जाते पकड़कर श्री चरणार को । 2. बने जो दास सत्पुरुषों का छूट जाए … Read more

अमृत नाम देकर जीव को ले जाते निजधाम

कविता – अमृत नाम देकर अमृत नाम देकर जीव को ले जाते निजधाम । केवल पूर्ण सतगुरु ही हैं जो करते सरल मुकाम। मुक्त करते यम के त्रास से जो लेवे दामन थाम । इन जैसा उपकारी न कोई इनकी महिमा महान। 2. जिस जिस जीव ने पूरे सतगुरु की टेक है धारी। कलह कल्पना … Read more

जुदा सारे जहान से होती है आशिकों की राह

कविता जुदा सारे जहान से होती है आशिकों की राह । हठ छोड़कर बढ़ते रहते बिना चिंता और चाह । मुर्शिद के सिवा न करते वे किसी की परवाह । सामी वे सदा ही करते मालिक की वाह वाह । 2. आशिक कहलवाना है तो दे तन की सुध भुला । सतगुरु को कर सिर … Read more

हउमै की आग में जिसने स्वयं को है जारा- कविता

1. हउमै की आग में जिसने स्वयं को है जारा खोकर सुख व चैन फिरता वह मारा मारा । मालिक के वचनों पर जिसने सर्वस्व वारा । छुटकारा पा गमों से जीवन उसने सँवारा । 2. तलबगार है अगर तू सतगुरु की मेहर का । तो देना होगा दिल से सारी हउमै को मिटा । … Read more

सतगुरु जी ने राग द्वेष का परदा दूर किया

कविता- सतगुरु जी ने राग द्वेष का परदा सतगुरु जी ने राग द्वेष का परदा दूर किया । कर इनायत ज्ञान की रोशनी से भरपूर किया । दर्शन की प्यासी आँखों को अपना सरूर दिया । चढ़ा नाम की मस्ती प्रेम के नशे में चूर किया । 2. इन्द्रियां विषय भोगों से सहज ही हो … Read more

पुस्तकों से ज्ञान

पुस्तकों से ज्ञान

॥ कविता ॥ – पुस्तकों से ज्ञान पुस्तकों से ज्ञान कितना भी कर लो अर्जित,सब थोथा है, पूरे सतगुरु बिना ।केवल गुरु ही हैं सच्चे ज्ञान के दातार भण्डार,आकर चरणों में उनके अज्ञानता ले मिटा । गुरु द्वार आकर ले तालीम सच्चे ज्ञान की,धार गरीबी मन में ले दात पावन नाम की।आलस्य को त्याग, कर … Read more

कथनी और करनी

कथनी और करनी

॥ कविता ॥ – कथनी और करनी का भेद अड़सठ तीरथ कर ले चाहे काशी और हरिद्वार,पढ़ ले पुराण अठारह, सभी शास्त्र व वेद चार ।तुला दान, गो दान, सब कर ले कर्म अपार,मन से किए कर्म ये सारे, बढ़ाते हैं अहंकार । केवल कथा साथ न दे, कर करनी पर विचार,बिना किए मिले न … Read more

अनहद नाद

अनहद नाद

॥ कविता ॥ – अनहद नाद गुरु किरपा से अनहद की जिसने सुनी आवाज़ ।सहजे ही सब हो गए उस के पूर्ण काज ॥माया नहीं सकती उस शख्स का कुछ बिगाड़ ।सतगुरु के शब्द की जिस ने ली है आड़ ॥ कोई कोई विरला प्रेमी ही अनहद नाद सुन पाए ।कर विश्वास जो गुरु वचनों … Read more

झूठा धन

झूठा धन

॥ कविता ॥ – झूठा धन झूठा धन समर्पित करके,ले सतगुरु से सच्चे नाम का धन । मिले उसे दो जहानों की दौलत,करे गुरु को जो तन मन अर्पण । अपना अस्थिर मन दे सतगुरु को,उनसे स्थिर शांत मन ले लो। करके अपना सर्वस्व समर्पित,अनामी अटल शाश्वत पद ले लो। महबूब नहीं मिलेगा मोलक्यों बाज़ारों … Read more

अमृत पैदा होता है

अमृत

॥ कविता ॥ – अमृत पैदा होता है अमृत पैदा होता है सतगुरु के शब्द से,अमर हो जाता है वह जो कोई इसको चख ले । कोई भाग्यशाली ही इस बूंद का रसपान करे,रह हुकम में गुरु की आज्ञा को जो है शीश धरे । जो शिष्य सतगुरु के वचनों पर अडिग रहते नहीं, उन … Read more