जय सच्चिदानंद जी का अर्थ | jai sachidanand ji

जय सच्चिदानंद जी

“जय सच्चिदानंद जी”, शब्द तीन शब्दों से मिलकर बना है – सत्त, चित्त और आनंद. ये तीनों परमात्मा के गुण हैं.
सत्त का अर्थ है – अविनाशी, सदा रहने वाला .
चित्त का अर्थ है – चैतन्य अर्थात ज्ञान रूप (सब जानने वाला).
आनन्द का अर्थ है – उत्तेजना रहित सहज खुशी.
(Sat – Truth, Chit – Consciousness, Anand – Bliss)
“जय सच्चिदानंद” का अर्थ है कि आपके हृदय में जो सत्-चित-आनन्द रूप श्री सतगुरुदेव महाराज जी विराजमान हैं, उनकी जय हो.
हम सभी श्री गुरुमहाराज जी के अंश हैं. जब हम किसी गुरुमुख को हाथ जोड़कर कर “जय सच्चिदानंद” कहते हैं तो इसका अर्थ होता है कि हम उसके अन्दर विराजमान श्री गुरुमहाराज जी के स्वरुप की जय कर रहे हैं. इसी प्रकार सामने वाला गुरुमुख भी हमें “जय सच्चिदानंद” जी कहता है, यह अद्वैत का भाव प्रकट करता है. 🙏🌹सभी गुरूमुखों को सादर जय सच्चिदानंद जी l🌹🙏

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