सतगुरु

पुर्ण सद्गुरु के स्वरूप से देदीप्यमान किरणें प्रस्फुटित होती हैं, जो सूर्य के सदृश ज्योतिर्मय हैं तथा चन्द्रमा सदृश शीतल है। उनके सारगर्भित प्रवचन सूर्य के समान प्रकाशमय हैं जिनके द्वारा अज्ञानता का अन्धेरा दूर हो जाता है।

योगासन | योग आसन | yoga asanas in Hindi

शीर्षासन योगासनों में शीर्षासन को सबसे अच्छा माना गया है। इस आसन को कई नामों से जाना जाता है जैसे-… Read More

क्या आप जानते हैं आत्मा की अवस्थाएँ कौन कौन सी होती है ?

हमारी आत्मा की अवस्थाएँ क्या आप जानते हैं - कि वेदादि ग्रंथों में हमारी आत्मा की पाँच अवस्थाएँ वर्णित हैं—… Read More

सुरत शब्द योग – सतगुरु प्रेमिओं के लिए ध्यान करने का तरीका

सुरत शब्द योग का अर्थ सुरत शब्द योग सुरत का अर्थ - आत्मा , शब्द का अर्थ - नाम (जो… Read More

दिव्य संगीत – संगीत का अतुलनीय आनन्द

दिव्य संगीत दिव्य संगीत आत्म-विज्ञान जो मनुष्य और उसके निर्माता से सम्बन्धित है, उतना ही प्राचीन है, जितनी यह सृष्टि।… Read More

गोस्वामी तुलसीदास जी का जीवन परिचय

गोस्वामी तुलसीदास जी की संक्षिप्त जीवनी तुलसीदास जी का जन्म प्रयागके पास चित्रकूट जिलेमें राजापुर नामक एक ग्राम है, वहाँ… Read More

अमूल्य स्वांस

परमसन्त श्री कबीर साहिब जी अमूल्य स्वांस - परमसन्त श्री कबीर साहिब जी कपड़ा बुनने का काम करते थे। एक… Read More